Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.29.33: जो बलवान मनुष्य को भी, जब वह उसे गाली देता है या क्रोध में आकर मारता है, क्षमा कर देता है और जो सदैव अपने क्रोध को वश में रखता है, वही विद्वान् और महापुरुष है ॥33॥ | mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आक्रुष्टस्ताडित: क्रुद्ध: क्षमते यो बलीयसा।
यश्च नित्यं जितक्रोधो विद्वानुत्तमपूरुष:॥ ३३॥
अनुवाद
जो बलवान मनुष्य को भी, जब वह उसे गाली देता है या क्रोध में आकर मारता है, क्षमा कर देता है और जो सदैव अपने क्रोध को वश में रखता है, वही विद्वान् और महापुरुष है ॥33॥
He who forgives even a strong man when he abuses him or hits him in anger and who always controls his anger is a learned and a great man. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥