Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.29.32: हे सुन्दरी! मनुष्य को सभी विपत्तियों में क्षमाशील रहना चाहिए। कहा जाता है कि सभी प्राणियों का जीवन क्षमाशील पुरुष पर ही निर्भर है। 32. | mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षन्तव्यं पुरुषेणेह सर्वापत्सु सुशोभने।
क्षमावतो हि भूतानां जन्म चैव प्रकीर्तितम्॥ ३२॥
अनुवाद
हे सुन्दरी! मनुष्य को सभी विपत्तियों में क्षमाशील रहना चाहिए। कहा जाता है कि सभी प्राणियों का जीवन क्षमाशील पुरुष पर ही निर्भर है। 32.
O beautiful one! A man should have a forgiving attitude in all adversities. It is said that the life of all creatures is dependent on a forgiving man. 32.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥