Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.29.27: यदि सभी लोग क्रोध से ग्रस्त हों, तो जो व्यक्ति किसी दूसरे के द्वारा गाली दिया जाता है, वह भी बदले में उसे गाली दे सकता है। जिस व्यक्ति को गाली दी जा रही है, वह भी बदले में उसे गाली दे सकता है। यदि एक व्यक्ति को हानि पहुँचती है, तो वह भी दूसरे व्यक्ति को हानि पहुँचा सकता है।॥27॥ | mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आक्रुष्ट: पुरुष: सर्वं प्रत्याक्रोशेदनन्तरम्।
प्रतिहन्याद्धतश्चैव तथा हिंस्याच्च हिंसित:॥ २७॥
अनुवाद
यदि सभी लोग क्रोध से ग्रस्त हों, तो जो व्यक्ति किसी दूसरे के द्वारा गाली दिया जाता है, वह भी बदले में उसे गाली दे सकता है। जिस व्यक्ति को गाली दी जा रही है, वह भी बदले में उसे गाली दे सकता है। यदि एक व्यक्ति को हानि पहुँचती है, तो वह भी दूसरे व्यक्ति को हानि पहुँचा सकता है।॥27॥
If everyone is overcome by anger, then a person who is abused by another can abuse him in return. The person who is being abused can abuse him in return. If one person is harmed, he can harm the other person as well.॥27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥