Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.29.25: यदि पृथ्वी के समान मनुष्यों में क्षमाशील लोग न होते, तो मनुष्यों में कभी शान्ति न होती; क्योंकि क्रोध ही झगड़ों का मूल कारण है। 25. | mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि न स्युर्मानुषेषु क्षमिण: पृथिवीसमा:।
न स्यात् संधिर्मनुष्याणां क्रोधमूलो हि विग्रह:॥ २५॥
अनुवाद
यदि पृथ्वी के समान मनुष्यों में क्षमाशील लोग न होते, तो मनुष्यों में कभी शान्ति न होती; क्योंकि क्रोध ही झगड़ों का मूल कारण है। 25.
If there were no forgiving people among humans like those on Earth, then there would never be peace among humans; because anger is the root cause of quarrels. 25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥