Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.29.23: अतः सदाचारी पुरुष को सदैव क्रोध का त्याग कर देना चाहिए। वर्णाश्रम का पालन न करने वाला पुरुष तो अच्छा है, परन्तु क्रोध करने वाला पुरुष अच्छा नहीं होता - यह निश्चित है ॥23॥ | mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः सदाचारी पुरुष को सदैव क्रोध का त्याग कर देना चाहिए। वर्णाश्रम का पालन न करने वाला पुरुष तो अच्छा है, परन्तु क्रोध करने वाला पुरुष अच्छा नहीं होता - यह निश्चित है ॥23॥
Therefore, a virtuous man should always renounce anger. A man who does not follow his Varnashrama is (relatively) good, but an angry man is not good - this is certain. ॥23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥