Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.29.22: मूर्ख लोग क्रोध को सदैव तीव्र मानते हैं। किन्तु यदि रजोगुण से उत्पन्न क्रोध का प्रयोग मनुष्यों के विरुद्ध किया जाए तो वह उनके विनाश का कारण बन जाता है ॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मूर्ख लोग क्रोध को सदैव तीव्र मानते हैं। किन्तु यदि रजोगुण से उत्पन्न क्रोध का प्रयोग मनुष्यों के विरुद्ध किया जाए तो वह उनके विनाश का कारण बन जाता है ॥ 22॥
Foolish people always consider anger to be intense. But if anger born of Rajoguna is used against humans then it becomes the cause of their destruction. ॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥