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mahabharat 3.29.20: कौशल, क्रोध, पराक्रम और शीघ्रता - ये तेजस के गुण हैं। क्रोध से दबा हुआ व्यक्ति इन गुणों को आसानी से प्राप्त नहीं कर सकता।   |   mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.29.20 
दाक्ष्यं ह्यमर्ष: शौर्यं च शीघ्रत्वमिति तेजस:।
गुणा: क्रोधाभिभूतेन न शक्या: प्राप्तुमञ्जसा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कौशल, क्रोध, पराक्रम और शीघ्रता - ये तेजस के गुण हैं। क्रोध से दबा हुआ व्यक्ति इन गुणों को आसानी से प्राप्त नहीं कर सकता।
 
Skill, anger, bravery and quickness - these are the qualities of Tejas. A person who is suppressed by anger cannot easily attain these qualities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)