Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.29.12: इसी प्रकार जो विद्वान पुरुष शक्तिशाली होते हुए भी दूसरों के द्वारा कष्ट दिए जाने पर क्रोध नहीं करता, बल्कि कष्ट देने वाले का नाश करने के स्थान पर परलोक में भी आनंद भोगता है ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.29.12 
विद्वांस्तथैव य: शक्त: क्लिश्यमानो न कुप्यति।
अनाशयित्वा क्लेष्टारं परलोके च नन्दति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जो विद्वान पुरुष शक्तिशाली होते हुए भी दूसरों के द्वारा कष्ट दिए जाने पर क्रोध नहीं करता, बल्कि कष्ट देने वाले का नाश करने के स्थान पर परलोक में भी आनंद भोगता है ॥12॥
 
Similarly, a learned man who, despite being powerful, does not become angry when others trouble him, instead of destroying the one who troubles him, enjoys bliss in the next world too. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)