Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.29.1: युधिष्ठिर बोले- हे परम बुद्धिमान द्रौपदी! क्रोध ही मनुष्यों का नाश करता है और क्रोध को जीतने से कल्याण होता है। तुम्हें यह जानना चाहिए कि उन्नति और अवनति दोनों ही क्रोध पर आधारित हैं (क्रोध को जीतने से उन्नति होती है और वश में करने से अवनति होती है)।॥1॥ | mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर बोले- हे परम बुद्धिमान द्रौपदी! क्रोध ही मनुष्यों का नाश करता है और क्रोध को जीतने से कल्याण होता है। तुम्हें यह जानना चाहिए कि उन्नति और अवनति दोनों ही क्रोध पर आधारित हैं (क्रोध को जीतने से उन्नति होती है और वश में करने से अवनति होती है)।॥1॥
Yudhishthira said- O most intelligent Draupadi! It is anger that kills people and anger, if conquered, leads to prosperity. You should know that both progress and decline are based on anger (conquering anger leads to progress and being subdued leads to decline).॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥