श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.289.8 
ततो विभीषण: पार्थ राममिक्ष्वाकुनन्दनम्।
उवाच विज्वरं दृष्ट्वा कृताञ्जलिरिदं वच:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! तदनन्तर विभीषण ने इक्ष्वाकुकुलनन्दन श्री रामचन्द्रजी को स्वस्थ एवं स्वस्थ देखकर हाथ जोड़कर इस प्रकार कहा- 8॥
 
Yudhisthira! Thereafter, Vibhishana, seeing Ikshvakukulnandan Shri Ramchandraji healthy and well, folded his hands and said thus - 8॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd