श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.289.7 
तौ लब्धसंज्ञौ नृवरौ विशल्यावुदतिष्ठताम्।
गततन्द्रीक्लमौ चापि क्षणेनैतौ महारथौ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों पुरुषोत्तम, महारथी, होश में आते ही बाणों से मुक्त होकर आलस्य और थकावट त्यागकर क्षण भर में उठ खड़े हुए॥7॥
 
After regaining consciousness, both of them, the best of men, great warriors, freed from arrows, gave up laziness and tiredness and stood up in a moment. 7॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd