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mahabharat 3.289.6: तब सुग्रीव ने दिव्य मन्त्रों से अभिमंत्रित विशल्या नामक महाऔषधि का प्रयोग करके उनके शरीर से बाणों को निकालकर क्षण भर में उन्हें स्वस्थ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.289.6 
विशल्यौ चापि सुग्रीव: क्षणेनैतौ चकार ह।
विशल्यया महौषध्या दिव्यमन्त्रप्रयुक्तया॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तब सुग्रीव ने दिव्य मन्त्रों से अभिमंत्रित विशल्या नामक महाऔषधि का प्रयोग करके उनके शरीर से बाणों को निकालकर क्षण भर में उन्हें स्वस्थ कर दिया।
 
Then Sugreeva, by using the great medicine called Vishalya consecrated with divine mantras, removed the arrows from their bodies and made them healthy in a moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)