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श्लोक 3.289.33  |
निर्याणे स मतिं कृत्वा निधायासिं क्षपाचर:।
आज्ञापयामास तदा रथो मे कल्प्यतामिति॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| तब रात्रिचर जीव ने युद्ध करने का निश्चय किया और तलवार नीचे रखकर आज्ञा दी, "मेरा रथ तैयार किया जाए।" ॥33॥ |
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| Then the night creature decided to go for the war and put down his sword and ordered, "My chariot should be made ready." ॥ 33॥ |
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इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि श्रीरामोपाख्यानपर्वणि इन्द्रजिद्वधे एकोननवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें इन्द्रजित्-वधविषयक दो सौ नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८९॥
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