श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.289.33 
निर्याणे स मतिं कृत्वा निधायासिं क्षपाचर:।
आज्ञापयामास तदा रथो मे कल्प्यतामिति॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तब रात्रिचर जीव ने युद्ध करने का निश्चय किया और तलवार नीचे रखकर आज्ञा दी, "मेरा रथ तैयार किया जाए।" ॥33॥
 
Then the night creature decided to go for the war and put down his sword and ordered, "My chariot should be made ready." ॥ 33॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि श्रीरामोपाख्यानपर्वणि इन्द्रजिद्वधे एकोननवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें इन्द्रजित्-वधविषयक दो सौ नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८९॥

 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd