श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.289.32 
एवं बहुविधैर्वाक्यैरविन्ध्यो रावणं तदा।
क्रुद्धं संशमयामास जगृहे च स तद्वच:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अनेक प्रकार के वचन कहकर अविन्ध्य ने रावण का क्रोध शांत किया और रावण ने उसकी बातें मान लीं ॥32॥
 
In this way, by speaking many kinds of words, Avindhya calmed Ravana's anger and Ravana accepted his words. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)