श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.289.31 
न हि ते विक्रमे तुल्य: साक्षादपि शतक्रतु:।
असकृद्धि त्वया सेन्द्रास्त्रासितास्त्रिदशा युधि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वीरता में तो स्वयं इन्द्र भी तुम्हारी बराबरी नहीं कर सकते। तुमने अनेक बार युद्ध में इन्द्र सहित समस्त देवताओं को भयभीत किया है (और पराजित भी किया है)॥31॥
 
Even Indra himself cannot match you in bravery. You have frightened (and defeated) all the gods including Indra in battle many times. 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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