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mahabharat 3.289.30: "मुझे लगता है कि उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े करना उसे मारने के लिए काफ़ी नहीं होगा। बस उसके पति को मार दो। अगर उसे मार दिया गया, तो वह अपने आप मर जाएगी।" 30.   |   mahabharat अध्याय 3.289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.289.30 
न चैषा देहभेदेन हता स्यादिति मे मति:।
जहि भर्तारमेवास्या हते तस्मिन् हता भवेत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
"मुझे लगता है कि उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े करना उसे मारने के लिए काफ़ी नहीं होगा। बस उसके पति को मार दो। अगर उसे मार दिया गया, तो वह अपने आप मर जाएगी।" 30.
 
"I think that cutting her body into pieces will not be enough to kill her. Just kill her husband. If he is killed, she will die automatically." 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)