श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.289.27 
अशोकवनिकास्थां तां रामदर्शनलालसाम्।
खड्गमादाय दुष्टात्मा जवेनाभिपपात ह॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वह दुष्टात्मा दशानन हाथ में तलवार लेकर बड़ी तेजी से सीता की ओर दौड़ा, जो अशोक वाटिका में भगवान राम के दर्शन की लालसा से बैठी हुई थीं॥ 27॥
 
The evil soul Dashanan, with sword in his hand, ran very fast towards Sita, who was sitting in the Ashoka garden, longing to see Lord Rama.॥ 27॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd