श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.289.24 
विनिकृत्तभुजस्कन्धं कबन्धं भीमदर्शनम्।
तं हत्वा सूतमप्यस्त्रैर्जघान बलिनां वर:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उसकी भुजाएँ और कंधे कट जाने से उसका धड़ बड़ा भयानक हो गया। इन्द्रजित् को मारकर बलवानों में श्रेष्ठ लक्ष्मण ने अपने अस्त्रों से उसके सारथि को भी मार डाला॥ 24॥
 
His torso looked very terrifying as his arms and shoulders were cut off. After killing Indrajit, Lakshmana, the greatest of the strong, also killed his charioteer with his weapons.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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