श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.289.22 
एकेनास्य धनुष्मन्तं बाहुं देहादपातयत्।
द्वितीयेन सनाराचं भुजं भूमौ न्यपातयत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
एक बाण से उसने इन्द्रजीत की धनुष धारण करने वाली भुजा काटकर शरीर से अलग कर दी तथा दूसरे बाण से शत्रु की बाण धारण करने वाली दूसरी भुजा को भी गिरा दिया।
 
With one arrow he cut off Indrajit's arm that was holding the bow and severed it from his body. With the second arrow he knocked down the enemy's other arm that was holding the arrow.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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