श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.289.21 
तस्यासून् पावकस्पर्शै: सौमित्रि: पत्त्रिभिस्त्रिभि:।
यथा निरहरद् वीरस्तन्मे निगदत: शृणु॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वीर सुमित्रकुमार ने अग्नि के समान प्रज्वलित तीन बाणों द्वारा किस प्रकार इन्द्रजित् के प्राण हर लिए, यह मैं तुम्हें बताता हूँ; सुनो॥21॥
 
Let me tell you how the brave Sumitra Kumar took the life of Indrajit with three arrows burning like fire; Listen. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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