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mahabharat 3.289.20: लक्ष्मण के बाणों से घायल होकर रावण का पुत्र क्रोध से मूर्छित हो गया और उसने उस पर आठ बाण छोड़े, जो विषैले साँपों के समान विषैले थे।   |   mahabharat अध्याय 3.289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.289.20 
सौमित्रिशरसंस्पर्शाद् रावणि: क्रोधमूर्च्छित:।
असृजल्लक्ष्मणायाष्टौ शरानाशीविषोपमान्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के बाणों से घायल होकर रावण का पुत्र क्रोध से मूर्छित हो गया और उसने उस पर आठ बाण छोड़े, जो विषैले साँपों के समान विषैले थे।
 
After being struck by Lakshman's arrows, Ravana's son fainted in anger. He shot eight arrows at him which were as poisonous as those of venomous snakes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)