श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.289.2 
तौ वीरौ शरबन्धेन बद्धाविन्द्रजिता रणे।
रेजतु: पुरुषव्याघ्रौ शकुन्ताविव पञ्जरे॥ २॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रजीत के बाणों से बँधे हुए वे दोनों वीर सिंह श्री राम और लक्ष्मण पिंजरे में बंद दो पक्षियों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Bound by Indrajit's arrows, those two valiant lions, Sri Rama and Lakshmana, looked like two birds caged in a cage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)