श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.289.19 
अविध्यदिन्द्रजित् तीक्ष्णै: सौमित्रिं मर्मभेदिभि:।
सौमित्रिश्चानलस्पर्शैरविध्यद् रावणिं शरै:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रजित ने तीक्ष्ण एवं भेदी बाणों से सुमित्रकुमार लक्ष्मण को घायल कर दिया। इसी प्रकार लक्ष्मण ने भी अग्नि के समान दाहक तीक्ष्ण छुरों से रावणपुत्र इन्द्रजित को घायल कर दिया।
 
Indrajit pierced Sumitra Kumar Lakshman with sharp and piercing arrows. Similarly, Lakshmana also injured Ravana's son Indrajit with sharp knives that had a burning touch like fire. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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