श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.289.14 
तथा समभवच्चापि यदुवाच विभीषण:।
क्षणेनातीन्द्रियाण्येषां चक्षूंष्यासन् युधिष्ठिर॥ १४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! विभीषण ने जो कहा था, उसका प्रभाव सत्य हुआ। क्षण भर में उन सबके नेत्र अतीन्द्रिय वस्तुओं को देखने में समर्थ हो गए ॥14॥
 
Yudhishthira! The effect of what Vibhishan had said was true. In a moment, the eyes of all of them became capable of seeing extra-sensory things. ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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