श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.289.12 
तथेति रामस्तद् वारि प्रतिगृह्याभिसंस्कृतम्।
चकार नेत्रयो: शौचं लक्ष्मणश्च महामना:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'बहुत अच्छा' कहकर श्री रामचन्द्रजी ने उस अभिमंत्रित जल को ग्रहण किया और महामनस्वी लक्ष्मण सहित उससे अपने नेत्र धोए॥ 12॥
 
Saying 'very good', Shri Ram Chandraji took the blessed water. Then he and the great-minded Lakshmana washed their eyes with it.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)