श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.289.11 
अनेन मृष्टनयनो भूतान्यन्तर्हितान्युत।
भवान् द्रक्ष्यति यस्मै च प्रदास्यति नर: स तु॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा कि इस जल से अपनी आँखें धोने से तुम अदृश्य प्राणियों को भी देख सकोगे और जिस व्यक्ति को तुम यह जल अर्पित करोगे, वह भी अदृश्य प्राणियों को देख सकेगा।॥11॥
 
He said that by washing your eyes with this water you will be able to see invisible creatures as well and the person to whom you will offer this water will also be able to see invisible creatures.'॥ 11॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd