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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 289: श्रीराम-लक्ष्मणका सचेत होकर कुबेरके भेजे हुए अभिमन्त्रित जलसे प्रमुख वानरोंसहित अपने नेत्र धोना, लक्ष्मणद्वारा इन्द्रजित् का वध एवं सीताको मारनेके लिये उद्यत हुए रावणका अविन्ध्यके द्वारा निवारण करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.289.1 
मार्कण्डेय उवाच
तावुभौ पतितौ दृष्ट्वा भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।
बबन्ध रावणिर्भूय: शरैर्दत्तवरैस्तदा॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं: युधिष्ठिर! राम और लक्ष्मण दोनों भाइयों को भूमि पर पड़े देखकर देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त रावण के पुत्र इन्द्रजित ने उन बाणों द्वारा उन्हें सब ओर से बाँध दिया।
 
Mārkaṇḍeya says: Yudhishthir! Seeing both the brothers, Rāma and Lakṣmān lying on the ground, Ravan's son Indrajit, who had received blessings from the gods, bound them from all sides with those arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)