Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.288.8: महाराज! जब रावण ने ऐसी आज्ञा दी, तब इन्द्रजित ने 'बहुत अच्छा' कहकर पिता की आज्ञा स्वीकार की और कवच धारण करके रथ पर बैठकर तुरंत युद्धभूमि की ओर चल पड़ा। | mahabharat अध्याय 3.288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्युक्त: स तथेत्युक्त्वा रथमास्थाय दंशित:।
प्रययाविन्द्रजिद् राजंस्तूर्णमायोधनं प्रति॥ ८॥
अनुवाद
महाराज! जब रावण ने ऐसी आज्ञा दी, तब इन्द्रजित ने 'बहुत अच्छा' कहकर पिता की आज्ञा स्वीकार की और कवच धारण करके रथ पर बैठकर तुरंत युद्धभूमि की ओर चल पड़ा।
King! When Ravana gave such orders, Indrajit accepted his father's orders saying 'very good' and wearing the armour, he sat on the chariot and immediately proceeded towards the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥