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mahabharat 3.288.4: हे शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, हे शत्रुओं का नाश करने वाले वीर योद्धा! देवताओं ने जिन दिव्य अस्त्रों के लिए तुम्हें आशीर्वाद दिया है, उनसे मेरे दृश्य या अदृश्य शत्रुओं का नाश करो।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.288.4 
अन्तर्हित: प्रकाशो वा दिव्यैर्दत्तवरै: शरै:।
जहि शत्रूनमित्रघ्न मम शस्त्रभृतां वर॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, हे शत्रुओं का नाश करने वाले वीर योद्धा! देवताओं ने जिन दिव्य अस्त्रों के लिए तुम्हें आशीर्वाद दिया है, उनसे मेरे दृश्य या अदृश्य शत्रुओं का नाश करो।॥4॥
 
O best amongst weapon bearers, O brave warrior who destroys enemies! Destroy my enemies either visible or invisible with the divine weapons for which the gods have blessed you. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)