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श्लोक 3.288.26  |
तौ शरैराचितौ वीरौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।
पेततुर्गगनाद् भूमिं सूर्याचन्द्रमसाविव॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| श्री राम और लक्ष्मण दोनों भाई ऊपर से नीचे तक बाणों से बिंध गए; अतः वे पृथ्वी पर ऐसे गिर पड़े जैसे आकाश से सूर्य और चन्द्रमा गिरते हैं॥ 26॥ |
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| Both the brothers, Shri Ram and Lakshman were pierced with arrows from top to bottom; hence, they fell on the earth like the Sun and the Moon falling from the sky.॥ 26॥ |
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इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि रामोपाख्यानपर्वणि इन्द्रजिद्युद्धे अष्टाशीत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २८८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें इन्द्रजित्-युद्धविषयक दो सौ अट्ठासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८८॥
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