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mahabharat 3.288.22-23h: यद्यपि माया के कारण रावण का पुत्र अदृश्य हो जाने के कारण दिखाई नहीं दे रहा था, फिर भी वीर भाई श्री राम और लक्ष्मण उसके साथ युद्ध करते रहे। 22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  3.288.22-23h 
तमदृश्यं शरै: शूरौ माययान्तर्हितं तदा॥ २२॥
योधयामासतुरुभौ रावणिं रामलक्ष्मणौ।
 
 
अनुवाद
यद्यपि माया के कारण रावण का पुत्र अदृश्य हो जाने के कारण दिखाई नहीं दे रहा था, फिर भी वीर भाई श्री राम और लक्ष्मण उसके साथ युद्ध करते रहे। 22 1/2॥
 
Even though Ravana's son was not visible due to his disappearance due to Maya, the brave brothers Shri Ram and Lakshman continued fighting with him. 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)