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mahabharat 3.288.19-20h: महाराज! सारथी के मारे जाने पर रावण का पुत्र इन्द्रजित उस अश्वरहित रथ से कूद पड़ा और माया का आश्रय लेकर वहीं अदृश्य हो गया।   |   mahabharat अध्याय 3.288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  3.288.19-20h 
ततो हताश्वात् प्रस्कन्द्य रथात् स हतसारथि:॥ १९॥
तत्रैवान्तर्दधे राजन् मायया रावणात्मज:।
 
 
अनुवाद
महाराज! सारथी के मारे जाने पर रावण का पुत्र इन्द्रजित उस अश्वरहित रथ से कूद पड़ा और माया का आश्रय लेकर वहीं अदृश्य हो गया।
 
King! After the charioteer was killed, Ravana's son Indrajit jumped from that horseless chariot and taking shelter of Maya, disappeared there itself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)