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mahabharat 3.288.18-19h: युधिष्ठिर! अंगद ने क्रोधपूर्वक इन्द्रजित् को मारने के लिए जो वृक्ष फेंका था, उसी से इन्द्रजित् का रथ, सारथि और घोड़ों सहित नष्ट हो गया।   |   mahabharat अध्याय 3.288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  3.288.18-19h 
सोऽङ्गदेन रुषोत्सृष्टो वधायेन्द्रजितस्तरु:॥ १८॥
जघानेन्द्रजित: पार्थ रथं साश्वं ससारथिम्।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! अंगद ने क्रोधपूर्वक इन्द्रजित् को मारने के लिए जो वृक्ष फेंका था, उसी से इन्द्रजित् का रथ, सारथि और घोड़ों सहित नष्ट हो गया।
 
Yudhishthira! That tree thrown by Angada in anger to kill Indrajit destroyed his chariot along with his charioteer and horses. 18 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)