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mahabharat 3.288.1-2: मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! तदनन्तर यह सुनकर कि युद्ध में सेवकों सहित कुम्भकर्ण, महाधनुर्धर प्रहस्त और अत्यन्त बलवान धूम्राक्ष मारे गये, रावण ने अपने वीर पुत्र इन्द्रजित से कहा - 'शत्रु! तुम राम, लक्ष्मण और सुग्रीव को मार डालो।' 1-2॥   |   mahabharat अध्याय 3.288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  3.288.1-2 
मार्कण्डेय उवाच
तत: श्रुत्वा हतं संख्ये कुम्भकर्णं सहानुगम्।
प्रहस्तं च महेष्वासं धूम्राक्षं चातितेजसम्॥ १॥
पुत्रमिन्द्रजितं वीरं रावण: प्रत्यभाषत।
जहि रामममित्रघ्न सुग्रीवं च सलक्ष्मणम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! तदनन्तर यह सुनकर कि युद्ध में सेवकों सहित कुम्भकर्ण, महाधनुर्धर प्रहस्त और अत्यन्त बलवान धूम्राक्ष मारे गये, रावण ने अपने वीर पुत्र इन्द्रजित से कहा - 'शत्रु! तुम राम, लक्ष्मण और सुग्रीव को मार डालो।' 1-2॥
 
Markandeyaji says- Yudhishthir! Subsequently, after hearing that Kumbhakarna along with his servants, the great archer Prahastha and the extremely powerful Dhumraksha were killed in the battle, Ravana said to his brave son Indrajit - 'Enemy! You kill Ram, Lakshman and Sugriva. 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)