Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.287.9-10h: वानरों में श्रेष्ठ सुग्रीव का हृदय महान था। उसकी गति भी महान थी। उसने कुंभकर्ण के सिर पर साल का वृक्ष पटककर उसके दो टुकड़े कर दिए; फिर भी वह उसे कोई पीड़ा नहीं पहुँचा सका। | mahabharat अध्याय 3.287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स महात्मा महावेग: कुम्भकर्णस्य मूर्धनि॥ ९॥
बिभेद शालं सुग्रीवो न चैवाव्यथयत् कपि:।
अनुवाद
वानरों में श्रेष्ठ सुग्रीव का हृदय महान था। उसकी गति भी महान थी। उसने कुंभकर्ण के सिर पर साल का वृक्ष पटककर उसके दो टुकड़े कर दिए; फिर भी वह उसे कोई पीड़ा नहीं पहुँचा सका।
Sugreeva, the best of the apes, had a great heart. His speed was also great. He smashed the sal tree on Kumbhakarna's head and broke it into two pieces; however, he could not cause him any pain.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥