श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  3.287.6-7h 
तद् दृष्ट्वा व्यथनं कर्म कुम्भकर्णस्य रक्षस:॥ ६॥
उदक्रोशन् परित्रस्तास्तारप्रभृतयस्तदा।
 
 
अनुवाद
राक्षस कुम्भकर्ण का यह दु:खद कृत्य देखकर तारा आदि वानर भयभीत हो गये और जोर-जोर से चीखने लगे।
 
Beholding this sorrowful act of the demon Kumbhakarna, the monkeys such as Tara etc. became frightened and started shrieking loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)