श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.287.26 
अथाद्रिशृङ्गमादाय हनुमान‍् मारुतात्मज:।
अभिद्रुत्याददे प्राणान् वज्रवेगस्य रक्षस:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इतने में वायुनन्दन हनुमान्‌ ने पर्वत का शिखर हाथ में लेकर वज्रवेग नामक राक्षस पर आक्रमण करके उसके प्राण ले लिए॥26॥
 
Meanwhile, Vayunandana Hanuman, taking the peak of the mountain in his hand, attacked the demon named Vajraveg and took his life.॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)