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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.287.24 
महता शरवर्षेण राक्षसौ सोऽभ्यवर्षत।
तौ चापि वीरौ संक्रुद्धावुभौ तं समवर्षताम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण उन दोनों राक्षसों पर बाणों की भारी वर्षा कर रहे थे और वे दोनों वीर राक्षस भी अत्यन्त क्रोधित होकर लक्ष्मण पर बाणों की वर्षा कर रहे थे।
 
Lakshmana was showering a heavy shower of arrows on those two demons, and those two brave demons, being extremely enraged, were also showering arrows on Lakshmana. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)