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mahabharat 3.287.22: जब लक्ष्मण ने क्रोधित वज्रवेग और प्रमाथी को अपनी ओर आते देखा तो उन्होंने जोर से गर्जना की और अपने बाणों से उनकी गति रोक दी।   |   mahabharat अध्याय 3.287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.287.22 
तावाद्रवन्तौ संक्रुद्धौ वज्रवेगप्रमाथिनौ।
अभिजग्राह सौमित्रिर्विनद्योभौ पतत्त्रिभि:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जब लक्ष्मण ने क्रोधित वज्रवेग और प्रमाथी को अपनी ओर आते देखा तो उन्होंने जोर से गर्जना की और अपने बाणों से उनकी गति रोक दी।
 
When Lakshman saw the enraged Vajravega and Pramathi coming towards him, he roared loudly and stopped their movement with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)