श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.287.2 
स वीक्षमाणस्तत् सैन्यं रामदर्शनकाङ्क्षया।
अपश्यच्चापि सौमित्रिं धनुष्पाणिं व्यवस्थितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
फिर जब उन्होंने भगवान् श्री राम के दर्शन की इच्छा से उस सेना में चारों ओर देखा, तो देखा कि सुमित्रानन्दन लक्ष्मण हाथ में धनुष लिए खड़े हैं॥2॥
 
Then when he looked around in that army with the desire to see Lord Shri Ram, he saw Sumitranandan Lakshman standing with a bow in his hand. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)