श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.287.17 
तानप्यस्य भुजान् सर्वान् प्रगृहीतशिलायुधान्।
क्षुरैश्चिच्छेद लघ्वस्त्रं सौमित्रि: प्रतिदर्शयन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उसने अपनी चारों भुजाओं में विशाल शिलाएँ हथियार के रूप में उठा लीं। यह देखकर सुमित्रा के पुत्र ने अपने हाथों की फुर्ती दिखाते हुए पूर्वोक्त बाण चलाकर उसकी चारों भुजाएँ भी काट दीं।
 
He picked up huge rocks as weapons in his four arms. Seeing this, Sumitra's son showed the agility of his hands and shot the aforementioned arrow and cut off his four arms too.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)