श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  3.287.13-14h 
स तस्य देहावरणं भित्त्वा देहं च सायक:॥ १३॥
जगाम दारयन् भूमिं रुधिरेण समुक्षित:।
 
 
अनुवाद
वह बाण उसके कवच को चीरता हुआ, शरीर को छेदता हुआ, रक्तरंजित हो गया और पृथ्वी को भेदता हुआ उसमें समा गया।॥13 1/2॥
 
That arrow, cutting through his armour and piercing his body, became bloodstained and pierced the earth and penetrated it.'॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)