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mahabharat 3.287.12-13h: शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले लक्ष्मण ने कुम्भकर्ण के सामने जाकर उस पर निशाना साधकर सुवर्णमय पंखों से विभूषित एक महान बाण चलाया। 12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  3.287.12-13h 
सोऽभिपत्य महावेगं रुक्मपुङ्खं महाशरम्॥ १२॥
प्राहिणोत् कुम्भकर्णाय लक्ष्मण: परवीरहा।
 
 
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले लक्ष्मण ने कुम्भकर्ण के सामने जाकर उस पर निशाना साधकर सुवर्णमय पंखों से विभूषित एक महान बाण चलाया। 12 1/2॥
 
Lakshmana, the slayer of enemy warriors, went in front of Kumbhakarna and aimed at him and fired a great arrow adorned with golden feathers. 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)