vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 287: कुम्भकर्ण, वज्रवेग और प्रमाथीका वध
»
श्लोक 12-13h
श्लोक
3.287.12-13h
सोऽभिपत्य महावेगं रुक्मपुङ्खं महाशरम्॥ १२॥
प्राहिणोत् कुम्भकर्णाय लक्ष्मण: परवीरहा।
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले लक्ष्मण ने कुम्भकर्ण के सामने जाकर उस पर निशाना साधकर सुवर्णमय पंखों से विभूषित एक महान बाण चलाया। 12 1/2॥
Lakshmana, the slayer of enemy warriors, went in front of Kumbhakarna and aimed at him and fired a great arrow adorned with golden feathers. 12 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×