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mahabharat 3.286.8: राजा! पवनपुत्र को युद्ध के लिए आते देख सभी वानर बड़ी शीघ्रता से सब ओर से लौट पड़े।   |   mahabharat अध्याय 3.286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.286.8 
तं दृष्ट्वावस्थितं संख्ये हरय: पवनात्मजम्।
महत्या त्वरया राजन् संन्यवर्तन्त सर्वश:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजा! पवनपुत्र को युद्ध के लिए आते देख सभी वानर बड़ी शीघ्रता से सब ओर से लौट पड़े।
 
King! Seeing the son of the wind arriving for the battle, all the monkeys returned from all directions in great haste. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)