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mahabharat 3.286.5: युद्ध में रात्रिचर प्रहस्त को मारा गया देखकर धूम्राक्ष बहुत तेजी से वानरों की ओर दौड़ा।   |   mahabharat अध्याय 3.286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.286.5 
तं दृष्ट्वा निहतं संख्ये प्रहस्तं क्षणदाचरम्।
अभिदुद्राव धूम्राक्षो वेगेन महता कपीन्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में रात्रिचर प्रहस्त को मारा गया देखकर धूम्राक्ष बहुत तेजी से वानरों की ओर दौड़ा।
 
Seeing the night-charter Prahasta killed in the battle, Dhumraksha ran very fast towards the monkeys. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)