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mahabharat 3.286.4: बिजली के समान तीव्र उस महाशक्ति के प्रहार करते ही राक्षस प्रहस्त का सिर धड़ से अलग हो गया और वह तूफान से उखड़े हुए वृक्ष के समान नीचे गिरा हुआ दिखाई देने लगा।   |   mahabharat अध्याय 3.286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.286.4 
पतन्त्या स तया वेगाद् राक्षसोऽशनिवेगया।
हृतोत्तमाङ्गो ददृशे वातरुग्ण इव द्रुम:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
बिजली के समान तीव्र उस महाशक्ति के प्रहार करते ही राक्षस प्रहस्त का सिर धड़ से अलग हो गया और वह तूफान से उखड़े हुए वृक्ष के समान नीचे गिरा हुआ दिखाई देने लगा।
 
As soon as that great power, which was as fast as lightning, struck, the head of the demon Prahasta was separated from the body and he appeared fallen down like a tree uprooted by a storm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)