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mahabharat 3.286.29: दूषण के उन दोनों वीर भाइयों ने रावण से 'तथास्तु' कहा और कुम्भकर्ण को आगे करके तुरंत नगर से बाहर निकल गए।   |   mahabharat अध्याय 3.286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.286.29 
तथेत्युक्त्वा तु तौ वीरौ रावणं दूषणानुजौ।
कुम्भकर्णं पुरस्कृत्य तूर्णं निर्ययतु: पुरात्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
दूषण के उन दोनों वीर भाइयों ने रावण से 'तथास्तु' कहा और कुम्भकर्ण को आगे करके तुरंत नगर से बाहर निकल गए।
 
Those two brave brothers of Dushan said 'Tathastu' to Ravana and immediately left the city, leading Kumbhakarna ahead.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि रामोपाख्यानपर्वणि कुम्भकर्णनिर्गमने षडशीत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २८६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें कुम्भकर्णका युद्धके लिये प्रस्थानविषयक दो सौ छियासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)