श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.286.28 
इत्युक्त्वा राक्षसपति: कुम्भकर्णं तरस्विनम्।
संदिदेशेतिकर्तव्यं वज्रवेगप्रमाथिनौ॥ २८॥
 
 
अनुवाद
महारथी कुम्भकर्ण से ऐसा कहकर राक्षसराज रावण ने वज्रवेग और प्रमाथी को युद्ध में क्या करना चाहिए, यह समझाया और उन्हें अपने पीछे चलने की आज्ञा दी॥ 28॥
 
Having said this to the mighty warrior Kumbhakarna, the demon king Ravana explained to Vajraveg and Pramathi what to do in the war and ordered them to follow them.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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