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mahabharat 3.286.21-22: भयभीत राक्षसराज रावण ने उसे जगाने के बहुत प्रयत्न करने के बाद जब महाबली कुम्भकर्ण स्वस्थ, शान्त और निद्रा से मुक्त होकर उठ बैठा, तो उससे इस प्रकार कहा - 'भैया कुम्भकर्ण! तुम धन्य हो, जो इस प्रकार सो पा रहे हो।' 21-22.   |   mahabharat अध्याय 3.286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  3.286.21-22 
प्रबोध्य महता चैनं यत्नेनागतसाध्वस:।
स्वस्थमासीनमव्यग्रं विनिद्रं राक्षसाधिप:॥ २१॥
ततोऽब्रवीद् दशग्रीव: कुम्भकर्णं महाबलम्।
धन्योऽसि यस्य ते निद्रा कुम्भकर्णेयमीदृशी॥ २२॥
 
 
अनुवाद
भयभीत राक्षसराज रावण ने उसे जगाने के बहुत प्रयत्न करने के बाद जब महाबली कुम्भकर्ण स्वस्थ, शान्त और निद्रा से मुक्त होकर उठ बैठा, तो उससे इस प्रकार कहा - 'भैया कुम्भकर्ण! तुम धन्य हो, जो इस प्रकार सो पा रहे हो।' 21-22.
 
After making great efforts to wake him up, the frightened demon king Ravana, when the mighty Kumbhakarna sat up healthy, calm and free from sleep, said to him thus - 'Brother Kumbhakarna! You are blessed to be able to sleep like this. 21-22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)