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mahabharat 3.286.20: यह कहकर रावण ने बहुत ऊंचे स्वर में विभिन्न वाद्य बजाए और गहरी नींद में सो रहे कुंभकर्ण को जगा दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.286.20 
इत्येवमुक्त्वा विविधैर्वादित्रै: सुमहास्वनै:।
शयानमतिनिद्रालुं कुम्भकर्णमबोधयत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर रावण ने बहुत ऊंचे स्वर में विभिन्न वाद्य बजाए और गहरी नींद में सो रहे कुंभकर्ण को जगा दिया।
 
Having said this, Ravana played various musical instruments at a very high pitch and woke up Kumbhakarna who was sleeping deeply.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)